fbpx

भारत के लिए 2 टेस्ट खेले क्रिकेटर डेविड जॉनसन की 52 साल की उम्र में, बेंगलुरु में घर की बालकनी से गिरने से मौत की खबर एक सनसनी की तरह थी। जॉनसन शहर के कोथनूर में अपने चौथे फ्लोर के अपार्टमेंट की बालकनी से गिरे। ऐसा क्यों हुआ इसके लिए अलग वजह/बातें सामने आ रही हैं :- पत्नी का कहना है जॉनसन ‘ताजा हवा लेने’ बालकनी में थे और फिसल गए। – पुलिस आत्महत्या को नजरअंदाज नहीं कर रही है। – और भी कोई वजह हो सकती है।

कई क्रिकेटर रिटायर होने के बाद भी चर्चा में रहते हैं- अपनी किसी न किसी एक्टिविटी की वजह से लेकिन कुछ एकदम गुमनामी के अंधेरे में खो जाते हैं। जॉनसन भी खबरों में नहीं थे। पुलिस के अनुसार जॉनसन शराब की लत से जुड़ी दिक्कतों से परेशान थे और पिछले लगभग 6 महीने से शहर के एक एंटी डोपिंग सेंटर में जा रहे थे। वैसे, परिवार के एक करीबी दोस्त और क्रिकेट लेखक जोसेफ हूवर के मुताबिक़ इस घटना से कुछ दिन पहले से पेट की तकलीफ से परेशान थे और सेंट फिलोमेना हॉस्पिटल में भी इसके इलाज के लिए गए- तीन दिन पहले ही हॉस्पिटल से लौटे थे। लगभग दो साल पहले जबरदस्त वायरल अटैक हुआ था जिससे बड़े कमजोर हो गए थे।

इस पूरी चर्चा से ये तो स्पष्ट है कि वे फिट नहीं थे और सबसे ख़ास ये कि डिप्रेशन में थे। दो दिन पहले ही पत्नी से कहा था कि उन्हें लगता है कि लोग दरवाज़ों और खिड़कियों से अंदर झांक कर, उन्हें बुलाते हैं और इसीलिए सभी खिड़कियों पर पूरे कर्टेन डाल दिए थे।

उनकी इस हालत को लिखते/पढ़ते हुए ये सवाल जरूर उठना चाहिए कि ये सब तब क्यों सामने आ रहा है जब वे इन दिक्कतों की वजह से नहीं रहे? अब कर्नाटक स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन ने आश्वासन दिया है कि वे परिवार की मदद करेंगे जबकि भारत के खिलाड़ियों की प्लेयर्स वेलफेयर एसोसिएशन को तो शोक जाहिर करने की भी फुर्सत नहीं मिली। जो प्लेयर्स एसोसिएशन खुद बीसीसीआई के पैसों से चल रही हो- वह बीसीसीआई से अलग हट कर खिलाड़ियों के बारे में क्या सोचेगी? कम से कम इस एसोसिएशन को तो अपने हर सदस्य (जो अभी भी गिनती में बहुत ज्यादा नहीं हैं) की हालत की खबर होनी चाहिए ताकि जहां ज्यादा जरूरत हो अतिरिक्त मदद हो सके- ख़ास तौर पर डिप्रेशन और पैसे की तंगी के मामले में। टीम इंडिया के अफगानिस्तान के विरुद्ध टी20 वर्ल्ड कप जीत वाले मैच में बाजू पर काली पट्टी बांधने से क्रिकेटर या उसके परिवार को क्या हासिल हुआ? बीसीसीआई की जिम्मेदारी ये कहकर खत्म नहीं होती कि वे रिटायर क्रिकेटरों को पेंशन देते हैं।

जो दो टेस्ट खेले उन दोनों में कप्तान सचिन तेंदुलकर थे और उनके अनुसार वे ग्राउंड पर कभी हार नहीं मानते थे। संजय मांजरेकर को वह दौर याद है जब भारतीय क्रिकेट में सब मीडियम पेस से ही खुश थे- तब जॉनसन ‘फ़ास्ट’ थे। संयोग से उन सालों में कर्नाटक के पास गजब का ऑल-स्टार पेस अटैक था- जवागल श्रीनाथ (67 टेस्ट में 236 विकेट), वेंकटेश प्रसाद (33 मैचों में 96 विकेट) और डोडा गणेश (4 टेस्ट में 5 विकेट) इसमें थे और इन्हीं के साथ जॉनसन भी थे। इस टीम ने 1990 के 4 साल में 3 बार रणजी ट्रॉफी टाइटल (1995-96, 96-97, 98-99) जीता।

टेस्ट की तरह, जॉनसन फर्स्ट क्लास क्रिकेट भी ज्यादा नहीं खेले- 2001-02 में रिटायर, 28.63 औसत से 125 विकेट- 39 मैच में, एक 100 भी। 33 लिस्ट ए मैच-  41 विकेट। आखिरी मैच 2015 में कर्नाटक प्रीमियर लीग में था। 1995-96 रणजी ट्रॉफी में केरल के विरुद्ध उनके आंकड़े 10-152 थे- सबसे बेहतर प्रदर्शन दर्ज किया। इससे एकदम पहचान मिली और 1996 में फिरोजशाह कोटला में ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध टेस्ट में डेब्यू किया- चोटिल श्रीनाथ की जगह। दूसरे तेज गेंदबाज वेंकटेश प्रसाद थे और दिल्ली में स्पिनरों के दबदबे वाले मैच में दूसरी पारी में माइकल स्लेटर का विकेट लिया। दक्षिण अफ्रीका टूर पर गए लेकिन पहले टेस्ट में ही खेले और गिब्स एवं मैकमिलन के विकेट लिए।

बहरहाल कंट्रोल की कमी में टेस्ट करियर सिर्फ दो टेस्ट का रहा। दक्षिण अफ्रीकी ऑलराउंडर ब्रायन मैकमिलन को उनके साथ 1996-97 डरबन टेस्ट में खेलना याद है। ब्रायन ने अब बताया कि जब उनकी टीम को मालूम हुआ कि जॉनसन क्रिश्चियन हैं तो उन्हें दक्षिण अफ्रीका टीम के क्रिसमस लंच में शामिल होने बुला लिया था।

उस दौर में भारत में 130-132 किलोमीटर की रफ्तार से गेंदबाजी करने वाले कई थे पर जॉनसन उनसे तेज थे। कई जगह ये जिक्र है कि जब माइकल स्लेटर का विकेट लिया था तो वह गेंद लगभग 158 किमी (157.8) की तेजी वाली थी। वेंकटेश प्रसाद ने भी कहा कि वह धमाकेदार थे, बहुत तेज़ और कमाल का रन-अप। ये 157.8 किमी की तेजी वाला दावा दमदार नहीं है क्योंकि इसका कोई सबूत नहीं। एक रिपोर्ट में तो ये भी लिखा है कि डरबन में सबसे तेज गेंद फेंकी जो 142 किमी के आसपास थी। इन सब चर्चा में, रिटायर होने के बाद जब ऐसा लगा कि कुछ हासिल नहीं हुआ तो डिप्रेशन में चले गए।

चरनपाल सिंह सोबती

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *