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आईसीसी ने पिछले दिनों क्रिकेट के लिए प्लेइंग कंडीशंस में कुछ ख़ास संशोधन किए। ये  नई शर्तें 1 अक्टूबर, 2022 से लागू हैं यानि किअब समय आ गया है इन्हें ग्राउंड में देखने का। बड़े इवेंट की बात करें तो ऑस्ट्रेलिया में टी20 वर्ल्ड कप, इन नई कंडीशंस के साथ ही खेलेंगे। संक्षेप में इनकी चर्चा :

1. जब कोई बल्लेबाज कैच आउट होगा, तो नया बल्लेबाज स्ट्राइकर के सिरे पर आएगा, भले ही पिछला बल्लेबाज कैच से पहले ‘क्रॉस’ कर गया हो। 
इसका सबसे ज्यादा असर लिमिटेड ओवर क्रिकेट में पारी के आख़िर में नजर आएगा। अक्सर जब आखिरी एक-दो विकेट बचे हों और नॉन-स्ट्राइकर सिरे पर माहिर बल्लेबाज है, तो आम तौर पर कैच के दौरान क्रॉसिंग ओवर से इस माहिर बल्लेबाज को फायदा होता है। अब- 9 वां विकेट (कैच आउट) गिरने से नंबर 11 स्ट्राइक लेगा।

2. गेंद को चमकाने के लिए लार के इस्तेमाल पर प्रतिबंध इंटरनेशनल क्रिकेट में दो साल से भी ज्यादा से (कोविड से बचाव में) अस्थाई तौर पर लागू है- अब ये स्थाई हो गया।  

गेंदबाज सालों से गेंद पर लार लगाते रहे हैं (ये शरीर के पसीने से भारी है)- गेंद की एक तरफ की चमक बनाए रखने का ये बड़ा इस्तेमाल किया जा रहा तरीका है। इससे गेंद खराब होने पर भारी भी हो जाती है। इसी से रिवर्स स्विंग शुरू हुई। अब चूंकि इसके इस्तेमाल पर कोविड की वजह से प्रतिबंध था तो आपने नोट किया होगा- रैड बॉल क्रिकेट में पारंपरिक स्विंग ज्यादा नजर आई- रिवर्स स्विंग कम।

3. नए बल्लेबाज को अब टेस्ट और वनडे मैचों में दो मिनट के अंदर स्ट्राइक के लिए तैयार होना होगा- टी20 इंटरनेशनल में 90 सेकंड का मौजूदा समय लागू रहेगा।

इस कंडीशन का सीधा सा मतलब है जानबूझकर समय बर्बाद करने की चाल को रोकना खासकर टेस्ट के आख़िरी दिन करीबी टेस्ट मैचों में, जब चौथी पारी में बल्लेबाजी का रही टीम खेल में देरी की कोशिश करती है।

4. गेंद को खेलने का स्ट्राइकर का अधिकार- इसमें जरूरी है उसके बैट या शरीर का कुछ हिस्सा पिच पर हो। अगर इससे आगे निकल जाते हैं, तो अंपायर कॉल करेगा और डेड बॉल का इशारा कर देगा। ऐसी गेंद जो बल्लेबाज को पिच छोड़ने के लिए मजबूर करेगी, उसे भी नो बॉल कहा जाएगा।

आम तौर पर ऐसा देखने को नहीं मिलता पर मिसाल मौजूद हैं।

5. जब गेंदबाज, गेंदबाजी के एक्शन में है, तब किसी भी गलत तरीके या जानबूझकर फील्ड में कोई मूवमेंट होने पर अंपायर बल्लेबाजी टीम को 5 पेनल्टी रन दे सकते हैं और गेंद डेड घोषित होगी। 
फील्डर आमतौर पर बैक अप लेते हैं और उसके बाद आगे बढ़ते हैं- अब इसे गलत माना जाएगा, यदि डिलीवरी पूरी होने से पहले ऐसा किया तो। इससे सर्किल के अंदर के जो सिंगल्स बचा लिए जाते थे- अब मुश्किल होंगे।

6. नॉन-स्ट्राइकर क्रीज से बाहर निकलने पर आउट- अब ये ‘अनफेयर प्ले’ नहीं ‘रन आउट’ है और रन आउट के सभी लॉ इस पर भी लागू रहेंगे।  
लॉ पहले से है। अब ये आउट होने के अन्य दूसरे तरीकों में से एक है। स्पिरिट ऑफ़ क्रिकेट को लागू करने जैसी कोई बात इसमें नहीं है। फिर भी ये आउट कितने विवाद वाला है- इसकी मिसाल डीन-दीप्ति मामले में देख ही ली।

7. गेंदबाज डिलीवरी से पहले स्ट्राइकर के स्टंप्स की ओर, अपने डिलीवरी स्ट्राइड से पहले, स्ट्राइकर को रन आउट करने की कोशिश में गेंद नहीं फेंक सकता। ऐसा किया तो इसे डेड बॉल कहा जाएगा।

ज्यादातर गेंदबाज ऐसा नहीं करते, ख़ास तौर पर तेज गेंदबाज जब भाग रहा हो तो बिलकुल ही नहीं। अगर वे देख भी लेते हैं कि शॉट खेलने के लिए बल्लेबाज आगे निकल आया है तो  बिलकुल नहीं क्योंकि इससे चोट लग सकती है।

8. जनवरी 2022 से टी20 इंटरनेशनल में शुरू इन-मैच पेनल्टी (अगर फील्डिंग टीम, तय समय तक अपने ओवर नहीं फेंकती तो एक अतिरिक्त फील्डर बचे ओवरों के लिए, फील्डिंग सर्किल के अंदर आ जाएगा)- 2023 में आईसीसी पुरुष वर्ल्ड कप सुपर लीग के पूरा होने के बाद वनडे मैचों में भी लागू हो जाएगी ।

अब आम तौर पर टीमों को 50 ओवर को पूरा करने में लगभग चार घंटे लग रहे हैं। नकद जुर्माने की वे चिंता नहीं करते क्योंकि पैसा बोर्ड भरता है। इस कंडीशन से उनके खेल पर असर आएगा- आख़िरी दो या तीन ओवरों में 30 गज के सर्किल के बाहर एक फील्डर कम होने से खेल की स्कीम गड़बड़ा जाएगी- खास तौर पर जब रन रोकने की कोशिश हो रही हो।  वैसे तो हरबदलाव ख़ास है पर गेंद पर लार के इस्तेमाल पर रोक का मतलब है सालों से चले आ रहे खेल के एक तरीके पर रोक। सीम गेंदबाजी पर इसका असर आएगा। वसीम अकरम जैसे गेंदबाजों की कामयाबी में इस फेक्टर को नजरअंदाज नहीं कर सकते। वे या वकार यूनिस यूं ही गेंद नहीं फेंकते थे- टीम उनके लिए गेंद ‘तैयार’ करती थी। इसके दो हिस्से हैं- लार लगाना और चमक। कौन करेगा ये काम?
इसीलिए एक गेंद पर खेल पूरा होने के बाद, ये गेंद पहले से तय रास्ते से गेंदबाज के पास वापस आती है- विकेटकीपर से गली से पॉइंट से कवर से मिड-ऑफ और तब गेंदबाज के पास- यहां वे फील्डर ही होते हैं जो गेंद पर लार लगाने/चमकाने के लिए जिम्मेदार होंगे। अगर कोई फील्डर, जिसके पास ये ड्यूटी नहीं है, और गेंद उसके पास आ गई तो उसे इस स्कीम में शामिल फील्डर तक गेंद पहुंचाना है। जो फील्डर, बात न माने मसलन उसे लार लगाने या गेंद चमकाने की ड्यूटी नहीं दी और तब भी वह ऐसा करे तो वह डांट खाता था- उसे  ड्रेसिंग रूम में बैठा देने की धमकी दे देते थे।  साफ़ मतलब है कि इस स्कीम में गेंद को चमकाने या लार लगाने की ड्यूटी जिन्हें दी, उन्हें मालूम था कि क्या करना है- ठीक वहीं लार लगाते थे जहां वसीम/यूनिस चाहते थे और फिर इसे चमकाते थे। क्रिकेट में ऐसा नजारा शायद फिर कभी देखने को नहीं मिलेगा। वैसे लार के इस्तेमाल पर प्रतिबंध इंटरनेशनल क्रिकेट में दो साल से भी ज्यादा से तो लागू है और मौजूदा गेंदबाजों को इसकी आदत सी हो गई है। नए गेंदबाज लार लगाना सीखेंगे ही नहीं।

  • चरनपाल सिंह सोबती
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