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टी20 वर्ल्ड कप में टीम इंडिया की जीत के बाद जिन खास बातों की आगे कई साल तक चर्चा होगी उनमें से एक- बीसीसीआई ने ‘टीम’ के लिए 125 करोड़ रुपये का नकद इनाम घोषित किया। ऐसा लगता है कि बीसीसीआई सेक्रेटरी जय शाह को इनाम घोषित करने की इतनी जल्दी थी कि ये भी नहीं बताया कि ‘टीम’ से उनका क्या मतलब है? बाद में लिस्ट में कोच, सहायक स्टाफ और सेलेक्टर भी शामिल कर लिए। अभी भी, वानखेड़े स्टेडियम में टीम के औपचारिक स्वागत में डेकोरेटिव चेक देने के बावजूद ये स्पष्ट नहीं किया कि इसमें से किसे क्या मिलेगा? सभी को बराबर-बराबर पैसा तो मिलेगा नहीं।

सिर्फ 2011 में वर्ल्ड कप जीत के बाद, महेंद्र सिंह धोनी की टीम के अवार्ड वाली स्टेटमेंट की फाइल ही देख लेते तो ये गफलत न होती- तब टीम के हर खिलाड़ी को 2 करोड़ रुपये, कोचिंग और सहायक स्टाफ को 50-50 लाख रुपये जबकि सेलेक्टर को 25-25 लाख रुपये का बोनस दिया था। वैसे गफलत तब भी हुई थी और हर जगह सेलेक्टर का जिक्र नहीं था पर आख़िरी बात ये है कि उन्हें बोनस मिला। तब के श्रीकांत सेलेक्शन कमेटी के चीफ थे। कुल मिलाकर तब बोर्ड ने लगभग 39 करोड़ रुपये बांटे थे।

अब 125 करोड़ रूपये बांट रहे हैं यानि कि वर्ल्ड कप जीतने पर 2024 में इनाम की रकम 3.2 गुना बढ़ गई। कैसे तय हो कि इनाम की रकम सही है- ज्यादा या कम नहीं। इसके लिए तुलना बीसीसीआई के खजाने से कर सकते हैं। 2010-11 में, बीसीसीआई की बैलेंस शीट के मुताबिक उस साल मुनाफा 189.72 करोड़ था और खजाने में कुल 286.87 करोड़ रुपये थे। इस समय बीसीसीआई की जो आख़िरी बैलेंस शीट उपलब्ध है वह 2021-22 की है और उसके अनुसार सालाना मुनाफा 868.14 करोड़ जबकि खजाने में 5197.71 करोड़ रुपये।

यहां ये भी नोट कीजिए कि वास्तव में 2011 में भी जोश में जल्दबाजी की थी। जीत के कुछ ही मिनट बाद बीसीसीआई ने घोषणा की- हर खिलाड़ी को 1 करोड़ रुपये का इनाम। रिपोर्ट ये है कि खिलाड़ी इस रकम पर नाराज थे। बोर्ड के पास खिलाड़ियों का अन-ऑफिशियल संदेश ये था कि कम से कम 5-5 करोड़ रुपये तो दो। इस नाराजगी के बाद ही बोनस की रकम प्रति खिलाड़ी 2 करोड़ रुपये कर दी।

इस बार आईसीसी ने वर्ल्ड कप जीत पर 2.45 मिलियन डालर (लगभग 20.45 करोड़ रूपये) का अवार्ड दिया और साथ में (सेमीफाइनल और फाइनल छोड़कर) हर जीत पर 31154 डॉलर (ये हर टीम के लिए है) यानि कि कुल 22.01 करोड़ रुपये आईसीसी ने इनाम में दे दिए। जो इनाम देश में राज्य सरकार या और कोई देंगे- वह अलग है। अगर सिर्फ ऑफिशियल तय इनाम की बात करें तो इस बार आईसीसी ने नकद इनाम के तौर पर टी20 वर्ल्ड कप के इतिहास में सबसे ज्यादा रकम दी- 2022 में विजेता इंग्लैंड को 1.6 मिलियन डॉलर मिले थे यानि कि रोहित शर्मा की टीम को 850000 डॉलर ज्यादा मिले। टीम इंडिया के लिए कुल इनाम 147.01 करोड़ रूपये (22.01+125)।

आईसीसी का अकाउंट देखें तो भी सभी टीमों के लिए इस टूर्नामेंट में पहले की तुलना में ज्यादा इनाम था- टूर्नामेंट के लिए इनामी रकम 2022 में 5.6 मिलियन डॉलर के मुकाबले इस बार 11.25 मिलियन डॉलर थी। फाइनल में पराजित दक्षिण अफ्रीका को 1.28 मिलियन डॉलर (2022 में 800000 डॉलर) मिले जबकि हारने वाले सेमीफाइनलिस्ट अफगानिस्तान और इंग्लैंड को 787500 डॉलर (2022 में 400000 डॉलर)।

रोहित शर्मा की टीम के वर्ल्ड कप जीतने पर देश में सब खुश हैं पर क्या वास्तव में बीसीसीआई के 125 करोड़ रुपये के नकद इनाम देने पर भी खुश हैं? टीम को विशेष फ्लाइट से लाने और विक्ट्री परेड पर जो पैसा बहा- उसे तो भूल ही जाइए। सच ये है कि देश में इतनी बड़ी इनमे रकम दिए जाने पर खुशी/गुस्से से ज्यादा हैरानी है। हाल के सालों में बीसीसीआई ने कौन सा काम छोटे पैमाने पर किया- स्टेडियम और अन्य इंफ़्रा स्ट्रक्चर से क्रिकेट को कमर्शियल पहचान देने तक। इसी से इंटरनेशनल  क्रिकेट पर दबदबा बना। ये लिखने वालों की कमी नहीं कि ये वर्ल्ड कप तो खेले ही टीम इंडिया के लिए। उस पर एक नई आदत- हर घोषणा में क्रिकेट में ब्रिटेन को बैक फुट पर देख और पाकिस्तान की तंग हालत से तुलना कर खुश होना।

जल्दबाजी में बीसीसीआई सेक्रेटरी जय शाह ने टाइटल के लंबे इंतजार को खत्म करने की खुशी में टीम के लिए इनाम की घोषणा तो खुद कर दी- उसके बाद सफाई दी कि इनाम की रकम पर फैसला बीसीसीआई के बड़े ऑफिशियल ने मिलकर लिया। कब और कैसे- कोई नहीं जानता क्योंकि कोई मीटिंग तो हुई नहीं। सब जानते हैं- वे कैसे अकेले फैसले ले रहे हैं। 
इस 125 करोड़ रुपये के इनाम पर एक सबसे बड़ा सवाल ये है कि वास्तव में हर टीम को जीतने के लिए ही तो भेजते हैं- तो टीम ने दिया लक्ष्य ही तो हासिल किया। जब 2013 के बाद से कोई भी आईसीसी टाइटल न जीत पाने पर कभी उनके पैसे नहीं काटे (ये तो लगातार बढ़ते रहे) और सुविधाओं में कोई कमी न की तो जीतने पर छप्पड़ तोड़ने वाली कहावत क्यों सही साबित कर रहे हैं? इनाम देना परंपरा में है- 1983 से हर टीम को दे रहे हैं। तब हर खिलाड़ी के लिए 1 लाख रुपये का इनाम था (उसे भी देने के लिए पैसे नहीं थे) जो अब कई करोड़ रुपये तक आ पहुंचा है। क्रिकेटरों की, मदद के बिना खस्ता हालत के किस्से तो कई हैं पर भारत में दो नए का जिक्र जरूरी है- टेस्ट क्रिकेटर डेविड जॉनसन की तंग हालत में मौत और अंशुमान गायकवाड़ की कैंसर से बेहतर इलाज में मदद की जरूरत। इन पर बीसीसीआई का कोई ध्यान नहीं। अमीर क्रिकेटर और अमीर हो रहे हैं।

संयोग से पेरिस ओलंपिक सामने हैं। ये तो पिछले कुछ साल से ओलंपिक खेलों की तैयारी के लिए पैसा बढ़ा है अन्यथा इन खेलों के खिलाड़ियों की हालत और सुविधाओं की कमी किसी से छिपी नहीं। इस वर्ल्ड कप जीत के जश्न में हो रहे खर्चे को ध्यान में रखते हुए इन ख़बरों को पढ़िए-

  • इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन ने तय किया कि उनकी एक्जीक्यूटिव काउंसिल के 12 मेंबर पेरिस जाएंगे 5 दिन के लिए और उन्हें हर रोज 300 डॉलर (लगभग 25 हजार रुपये) डीए मिलेगा। 
  • ये बिजनेस क्लास में जाएंगे, चूंकि ऑफिशियल ऑल-एक्सेस कार्ड कम मिले हैं- इसलिए इनके लिए महंगे एंट्री पास खरीदेंगे।

इसकी तुलना में खिलाड़ियों के लिए डीए 50 डॉलर रोज- वही जो तीन साल पहले टोक्यो ओलंपिक के वक्त मिला था। इसलिए शोर तो होना ही था। नतीजा- डीए, बिजनेस क्लास टिकट या अन्य सुविधाएं सब गायब। जो 4 ऑल-एक्सेस कार्ड मिले हैं- उनसे ही काम चलाएंगे। यहां तक कि ट्रेवल टिकट अपनी जेब से खरीदेंगे।

और देखिए- जो पेरिस में मेडल जीतेंगे उनके लिए सरकारी इनाम : गोल्ड- 1 करोड़ रुपये, सिल्वर- 75 लाख रुपये और ब्रॉन्ज़- 50 लाख रुपये और उनके कोच को क्रमशः 25 लाख रुपये, 15 लाख रुपये और 10 लाख रुपये। कितने मैडल आ सकते हैं पेरिस में? टोक्यो में कुल 7 थे जो अब तक का सबसे बेहतर रिकॉर्ड है- क्या अब की बार टोक्यो पार?

इनाम देने का सिस्टम दूसरे खेलों में, भारत से बाहर भी शुरू हो रहा है- इस बारे पेरिस में गोल्ड जीतने वाले हर एथलीट को वर्ल्ड एथलेटिक्स नकद इनाम देगी और इसी को देख कर आईबीए (बॉक्सिंग की इंटरनेशनल संस्था) ने भी अपने मेडल विजेताओं के लिए नकद इनाम घोषित कर दिया। पेरिस में एथलेटिक्स में 48 गोल्ड बंटेंगे- हर चैंपियन को 50000 डॉलर (लगभग 41.74 लाख रुपये) और आईबीए ने 11 इवेंट में विजेता के लिए गोल्ड-100000 डॉलर, सिल्वर- 50000 डॉलर और ब्रॉन्ज़- 25000 डॉलर के इनाम घोषित किए हैं। स्पष्ट है- खेल दो गुट में बंट गए हैं? अन्य दूसरे खेलों के खिलाड़ियों का क्या कसूर?

  • चरनपाल सिंह सोबती

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