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अब तक इंटरनेशनल क्रिकेट में दक्षिण अफ्रीका पर चोकर का लेबल लगता था – लगातार ICC टूर्नामेंट के नॉक आउट या सबसे ख़ास मैच में हारने के कारण। इनमें 1999 वर्ल्ड कप में ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध करीबी सेमीफाइनल में सनसनीखेज हार शामिल है। लेबल हटा नहीं, उससे पहले ही दक्षिण अफ्रीका का मुकाबला कमज़ोर पड़ गया।

WTC फाइनल से पहले फिर से क्रिकेट में चोकर की चर्चा हुई। दोनों टीम अपने नाम इस टाइटल को लेने से बच रही थीं। न्यूजीलैंड दो ICC वर्ल्ड कप फाइनल हारने का दर्द झेल रहा था। दूसरी तरफ टीम इंडिया का रिकॉर्ड तो और भी खराब था। वही हुआ जिसका डर था और चोकर का लेबल लग गया टीम इंडिया के नाम पर। इसमें गलत भी क्या है – 6 बार नॉकआउट में पहुंचने के बावजूद पिछले 8 साल में कोई ICC टूर्नामेंट नहीं जीता है। वह भी तब जबकि हर बार जीत के ज़ोरदार दावेदार थे।

भारत ने आखिरी बार कोई ICC टूर्नामेंट 2013 में जीता – फाइनल में इंग्लैंड को हराकर एमएस धोनी की कप्तानी में चैंपियंस ट्रॉफी। तब से, भारत 2015 वर्ल्ड कप, 2016 वर्ल्ड टी 20 और 2019 वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में बाहर हुए जबकि 2014 वर्ल्ड टी 20, 2017 चैंपियंस ट्रॉफी और WTC फाइनल में हारे।ये कोई ऐसा रिकॉर्ड नहीं कि नज़रअंदाज़ कर दें। कोई जीत नहीं, बस टाइटल लगातार दूर है। देखिए :

  • 2014 वर्ल्ड टी 20: फाइनल में हारे- ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका पर प्रभावशाली जीत सहित नाबाद टीम के तौर पर फाइनल में पहुंचे थे ।
  • 2015 वर्ल्ड कप: सेमीफाइनल में मेजबान (ऑस्ट्रेलिया) से हारने से पहले हर मैच जीता था।
  • 2016 वर्ल्ड टी 20 : वेस्टइंडीज के विरुद्ध एकतरफा सेमीफाइनल में हारे।
  • 2017 चैंपियंस ट्रॉफी: दो बड़ी जीत के साथ फाइनल में पहुँचने के बाद पाकिस्तान से हारे।
  • 2019 वर्ल्ड कप: इंग्लैंड के विरुद्ध मैच को छोड़कर सभी लीग मैच जीते, लेकिन सेमीफाइनल में हार गए।
  • 2021 वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप : फाइनल में हारे- वही कहानी। कई मुश्किल के बावजूद फाइनल में पहुंचे, फेवरिट थे पर हारे।

इस रिकॉर्ड की क्या वजह है? साफ़ है कि ऐसे मैचों के लिए जिस मानसिक दृढ़ता या किलर इंस्टिंक्ट की जरूरत होती है उसकी कमी रही – कई टॉप क्रिकेटर टीम इंडिया में होने के बावजूद। तो क्या टीम उम्मीद के दबाव को नहीं झेल पा रही ?

ये सच्चाई है कि टाइटल जीतने की लिए किस्मत का साथ जरूरी है।1983 की वर्ल्ड कप जीत को ही लीजिए – टॉप टीम वेस्ट इंडीज को हराया पर ये भी माना कि अगर दोनों टीम इसके बाद लगातार 10 वन डे खेलतीं एक दूसरे के विरुद्ध तो शायद भारत के लिए एक मैच भी जीतना मुश्किल हो जाता। जो मैच सबसे ख़ास था उसमें किस्मत कपिल देव के साथ थी।

कप्तान के तौर पर विराट कोहली की सबसे ज्यादा तुलना एमएस धोनी से होती है और वे कई मायने में बेहतर साबित होते हैं पर जब ICC टूर्नामेंट जीतने का रिकॉर्ड देखें तो धोनी बाज़ी मार जाते हैं। इसलिए विराट कोहली की टीम जब तक किसी ICC टूर्नामेंट ट्रॉफी पर अपना नाम नहीं लिखती, “चोकर्स” का टैग लगा रहेगा। इस टैग से निकालेगा कौन – और कोई नहीं ये जिम्मेदारी खुद विराट कोहली को लेनी होगी।

2011 वर्ल्ड कप में जीत को अगर एक इतिहास मान लें और उसके बाद से ICC इवेंट के नॉक आउट मैचों में भारत के स्कोर कार्ड में विराट कोहली की बैटिंग देखें तो एक ख़ास बात नोट करने को मिलेगी। देखिए :

  • 2013 चैंपियंस ट्रॉफी फाइनल में इंग्लैंड के विरुद्ध जीत में विराट कोहली के 34 गेंद में 43 रन। कप्तान धोनी थे।
  • 2014 वर्ल्ड टी 20 फाइनल में श्रीलंका से हार में विराट कोहली के 58 गेंद में 77 रन। कप्तान धोनी थे।
  • 2015 ओडीआई वर्ल्ड कप सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध हार में विराट कोहली के 13 गेंद में 1 रन। कप्तान धोनी थे।
  • 2016 वर्ल्ड टी 20 सेमीफाइनल में वेस्टइंडीज के विरुद्ध हार में विराट कोहली के 47 गेंद में 89* रन। कप्तान धोनी थे।
  • 2017 चैंपियंस ट्रॉफी फाइनल में पकिस्तान के विरुद्ध हार में विराट कोहली के 9 गेंद में 5 रन। कप्तान विराट कोहली थे।
  • 2019 ओडीआई वर्ल्ड कप सेमीफाइनल में न्यूजीलैंड के विरुद्ध हार में विराट कोहली के 6 गेंद में 1 रन। कप्तान विराट कोहली थे ।
  • 2019-21 WTC फाइनल में न्यूजीलैंड के विरुद्ध हार में विराट कोहली के 44 और 13 रन। कप्तान विराट कोहली थे । इस लिस्ट में 2012 टी 20 वर्ल्ड कप का जिक्र नहीं है क्योंकि उसमें तो सुपर 8 में ही बाहर हो गए और नॉकआउट राउंड में पहुंचे ही नहीं।

इसका मतलब ये हुआ कि कप्तान के तौर पर ICC टूर्नामेंट के नॉकआउट मैचों में विराट कोहली ने सिर्फ 9,1,44 और 13 के स्कोर बनाए – आखिरी दो स्कोर टेस्ट क्रिकेट के जिनमें स्ट्राइक रेट तेज करने का दबाव भी नहीं था। विराट कोहली के बारे में रिकॉर्ड ये है कि ऐसे क्रिकेटर हैं जो कप्तानी की जिम्मेदारी को अपनी बैटिंग पर नहीं आने देते – पर उन मैचों का क्या करें जहां कोई और दूसरा मौका नहीं मिलता यानि कि नॉक आउट मैच। भारत ने अपने इस स्टार बल्लेबाज़ की इन बड़े मैचों में नाकामयाबी की बहुत बड़ी कीमत चुकाई है।

संयोग से भारत – न्यूजीलैंड साउथेम्प्टन WTC फाइनल के आख़िरी दिन उस 2013 चैंपियंस ट्रॉफी जीत की सालगिरह थी। खिताब जीतकर, धोनी ने कप्तान के तौर पर एक और जीत दर्ज़ की। उसके बाद से जीते कहाँ हैं?

  • चरनपाल सिंह सोबती
17 thoughts on “और किसी को नहीं, खुद विराट कोहली को टीम इंडिया को चोकर के लेबल से निकालना होगा !”
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