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इन दिनों में बीसीसीआई ने टेस्ट क्रिकेट को बढ़ावा देने की जिम्मेदारी के अपने रोल में सभी को हैरान कर दिया है। सबसे पहले तो ईशान किशन, श्रेयस अय्यर और दीपक चाहर सहित कुछ खिलाड़ियों की रेड बॉल क्रिकेट न खेलने के आरोप में सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट लिस्ट से छुट्टी हुई और अभी इसकी चर्चा खत्म भी नहीं हुई थी कि टेस्ट खेलने को वरीयता देने वालों के लिए मेगा इंसेंटिव स्कीम शुरू कर दी।

ऐसी कोई इसकी स्कीम हो, ये बात तब भी उठी थी जब चेतेश्वर पुजारा सिर्फ टेस्ट खेल पाते थे- वनडे और टी20 इंटरनेशनल टीम में जगह मिलना तो दूर, उनके लिए आईपीएल टीम के पास भी, कभी-कभी, सिर्फ तरस खाने वाला कॉन्ट्रैक्ट ही था। इसलिए एक टॉप क्रिकेटर होने के बावजूद वे अपने से कम टेलेंट वालों से भी कम पैसा कमाते रहे। अब जो टेस्ट खेलने को ही (ठीक वैसे ही जैसे कई सिर्फ वाइट बॉल क्रिकेट खेलना चाहते हैं) लक्ष्य बनाएंगे- उनके लिए भी पैसा कम नहीं है।

स्कीम समझिए :-

  • प्रति टेस्ट अधिकतम इंसेंटिव 45 लाख रुपयेये इंसेंटिव, प्रति टेस्ट मौजूदा 15 लाख रुपये (रिजर्व को 7.5 लाख रुपये) फीस के ऊपर मिलेगा
  • इस तरह एक टेस्ट खिलाड़ी, जो एक सीज़न में 10 टेस्ट तक खेल गया उसे 4.50 करोड़ रुपये इंसेंटिव में मिल जाएंगे
  • सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट (जो भी ग्रेड होगा उस हिसाब से) अलग से मिलेगा
  • इंसेंटिव की रकम सीजन में खेले टेस्ट (यानि कि प्लेइंग इलेवन में हैं) के हिसाब से बदलेगी : अगर सीजन के 9 में से 4 टेस्ट खेले (50 प्रतिशत से कम) तो कोई इंसेंटिव नहीं- सिर्फ मैच फीस मिलेगी, अगर इन 9 में से 5 से 6 टेस्ट खेले (50 से 75 प्रतिशत तक) तो प्रति टेस्ट इंसेंटिव 30 लाख रुपये, अगर इन 9 में से 7 या ज्यादा टेस्ट खेले (75 से 100 प्रतिशत तक) तो प्रति टेस्ट इंसेंटिव 45 लाख रुपये
  • इंसेंटिव की रकम जब टीम में हैं पर प्लेइंग इलेवन में नहीं, तो इस तरह होगी :अगर सीजन के 9 में से 4 टेस्ट (50 प्रतिशत से कम) में टीम में तो कोई इंसेंटिव नहीं- सिर्फ मैच फीस मिलेगी, अगर इन 9 में से 5 से 6 टेस्ट (50 से 75 प्रतिशत तक) में टीम में तो प्रति टेस्ट इंसेंटिव 15 लाख रुपये, अगर इन 9 में से 7 या ज्यादा टेस्ट (75 से 100 प्रतिशत तक) में टीम में तो प्रति टेस्ट इंसेंटिव 22.5 लाख रुपये
  • इस स्कीम को 2022-23 सीज़न से शुरू माना है यानि कि जो टेस्ट क्रिकेट खेल चुके हैं- उसका इंसेंटिव भी मिलेगा
  • स्कीम शुरु करने की वजह : बोर्ड सेक्रेटरी जय शाह के अनुसार- सम्मानित एथलीटों को फाइनेंशियल डेवलपमेंट और स्टेबिलिटी देना।

ये किसी से छिपा नहीं कि बीसीसीआई पर टेस्ट क्रिकेट को नुकसान पहुंचाने (आईपीएल की बदौलत टी20 क्रिकेट की क्रांति) के सबसे ज्यादा आरोप हैं जबकि सच्चाई ये है कि भारत ने टेस्ट क्रिकेट को कभी नजरअंदाज नहीं किया और हर सीजन में सबसे ज्यादा टेस्ट क्रिकेट खेलने वालों में से हैं। टी20 क्रिकेट में आई क्रांति के लिए अकेले बीसीसीआई या आईपीएल जिम्मेदार नहीं- सभी देश टी20 लीग की रेस में जुट गए जिससे क्रिकेट कैलेंडर भर गया, दर्शक टेस्ट से टी20 क्रिकेट में ट्रांसफर हो गए, स्पांसर और ब्रॉडकास्टर ये समझने लगे कि क्रिकेट सिर्फ ब्रॉडकास्ट के लिए खेला जाने वाला खेल है और ये धारणा बन गई है कि भारत को टेस्ट क्रिकेट की कोई चिंता नहीं है।

वास्तव में भारत ने किसी भी फॉर्मेट के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की- हर फॉर्मेट में समय के हिसाब से बदलाव और तेजी देखने को मिली। भारत ने टेस्ट क्रिकेट को वरीयता दी- 4 साल के वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप के बैक-टू-बैक फाइनल में जगह इसका सबूत नहीं तो और क्या है? 5 टेस्ट की सीरीज गायब हो रही हैं- भारत न सिर्फ ऐसी सीरीज खेल रहा है, आयोजित भी कर रहा है। पैसा बनाना एक अलग मसला है पर पैसे से ‘बिग ब्रदर’ बनने को टेस्ट क्रिकेट को नुकसान पहुंचाने के आरोप में नहीं बदल सकते। हाल के सालों में कुछ सबसे रोमांचक टेस्ट न सिर्फ भारत ने खेले हैं- जीते भी हैं। वास्तव में यहां हर फॉर्मेट बढ़ा है- 50 ओवर के पिछले 4 वर्ल्ड कप में भारत ने एक बार टाइटल जीता, दो सेमीफाइनल और एक फाइनल हारे

आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी के पिछले दो आयोजन (2013 और 2017) – एक टाइटल और दूसरे में फाइनल खेले। 
अब ये इंसेंटिव स्कीम जो वास्तव में क्रिकेटरों की ये सोच बदलेगी कि सिर्फ टी20 क्रिकेट में पैसा है- रेड बॉल क्रिकेट के विशेषज्ञ क्रिकेटर भी बराबरी पर रहेंगे। टॉप भारतीय क्रिकेटर रोहित शर्मा, विराट कोहली, जसप्रीत बुमरा, आर अश्विन, रवींद्र जड़ेजा, केएल राहुल, ध्रुव जुरेल, यशस्वी जायसवाल, सरफराज खान और अन्य कई टेस्ट क्रिकेट को पूरा महत्व दे रहे हैं और इसीलिए ही तो लगातार अच्छे खिलाड़ी मिल रहे हैं। टेस्ट क्रिकेट खेलने की आर्ट अगर खत्म हो रही है तो दोष सिर्फ भारत के नाम क्यों लिखें- भारत में टेस्ट सीरीज में, इंग्लैंड की टीम ने एक बार भी ये नहीं दिखाया कि वे एक इनिंग में 80 ओवर से ज्यादा बल्लेबाजी कर सकते हैं।

2020 में, क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया दिवालिया होने के कगार पर था- भारत के टूर से 300 मिलियन डॉलर ने ऑक्सीजन दी और बचा लिया। कोविड में भी भारत ने किसी सीरीज को खेलने से इनकार नहीं किया- ऑस्ट्रेलिया गए जहां सबसे ज्यादा सख्ती थी। एक ऐतिहासिक सीरीज खेले और क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया को बचा लिया। ये जिक्र तो सब जगह होता है कि आईसीसी की कमाई में से लगभग 38 प्रतिशत हिस्सा बीसीसीआई को मिलता है पर ये जिक्र कोई नहीं करता कि एशियन क्रिकेट काउंसिल की कमाई में भी सबसे बड़ा हिस्सेदार होने के बावजूद भारत इस कमाई में से सिर्फ 1 प्रतिशत हिस्सा लेता है (ओपचारिकता के लिए) ताकि एशिया के अन्य क्रिकेट देशों को अपने देश में क्रिकेट को बढ़ावा देने के लिए ज्यादा पैसा मिल सके। भारतीय उपमहाद्वीप की क्रिकेट बिरादरी को और कौन ऐसी मदद दे रहा है? एशिया कप में भारत का खेलना, महज एशिया कप को खत्म होने से रोकना है- ये टूर्नामेंट एशिया के अन्य क्रिकेट देशों की मदद करता है। सिर्फ पैसा कमाना हो तो इसे खेलने के दिनों में बहुत से अन्य विकल्प हैं।

ये इंसेंटिव स्कीम बीसीसीआई की ये दिखाने की एक और कोशिश है कि वे टेस्ट क्रिकेट के लिए बहुत कुछ कर सकते हैं और बेहतर ढंग से कर सकते हैं। 

  • चरनपाल सिंह सोबती

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