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इस रिपोर्ट के लिखने के समय भारत आगे है 2-0 से ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध टी20 सीरीज में- किसी भी समय इन दोनों टॉप टीम के बीच सीरीज को बेमिसाल कह दिया जाता पर इस समय जबकि वर्ल्ड कप की चर्चा हो ही नहीं पाई थी कि फाइनल में खेली दोनों टीम के बीच एक नई सीरीज शुरू हो गई। इसे देखते हुए तो ऐसा लगता है कि शायद दोनों में से किसी भी टीम को वर्ल्ड कप फाइनल खेलने की उम्मीद नहीं थी तभी तो 19 नवंबर के फाइनल के बावजूद 23 नवंबर से एक अलग फॉर्मेट की सीरीज खेलने का प्रोग्राम पहले से बना लिया था।

भारत को इस साल ऑस्ट्रेलिया के लिए ‘होम अवे फ्रॉम होम’ कहना गलत नहीं होगा- फरवरी-मार्च में 4 टेस्ट, मार्च में 3 वनडे, सितंबर में 3 वनडे, अक्टूबर-नवंबर में वर्ल्ड कप और नवंबर-दिसंबर में 5 टी20 मैच। वर्ल्ड कप फाइनल और किसी भी अन्य फॉर्मेट के अगले इंटरनेशनल मैच के बीच सबसे कम दिन का नया रिकॉर्ड बन चुका है- पिछला रिकॉर्ड 6 दिन का था जो 1996 में बना। ये बात अलग है कि मैचों की भीड़ में हालत ये हो गई है कि जिस दिन 2019 फाइनल खेले- उसी दिन दो और मैच भी क्रिकेट की दुनिया में खेले गए।

ठीक है सीरीज का प्रोग्राम पहले से बना था और तब किसे मालूम था कि यही दोनों टीम 19 नवंबर के फाइनल में आमना-सामना करेंगी? याद कीजिए- अप्रैल 2007 के वे दिन जब भारत की टीम, वर्ल्ड कप में बांग्लादेश और श्रीलंका से हार गई और सिर्फ बरमूडा को हरा सके थे यानि कि ग्रुप स्टेज में ही बाहर। तब रांची में धोनी के घर में 200 लोग घुस गए, तोड़-फोड़ की, उनका पुतला जलाया, कोच ने इस्तीफा दे दिया और कप्तान द्रविड़ ने भी- भारतीय क्रिकेट का ‘डाउन-फॉल’ कहा था इसे।

6 ही महीने के अंदर दक्षिण अफ्रीका में एक दूसरे फॉर्मेट का वर्ल्ड कप था और इसी टीम इंडिया ने वह किया जिसके बारे में सोचा भी नहीं था। जिस धोनी के घर तोड़-फोड़ की थी वह अब कप्तान थे और उसी ने आखिरी ओवर में जोगिंदर शर्मा को गेंद थमाकर भारत को पाकिस्तान पर फाइनल में एक ऐसी जीत दिलाई जो सपने जैसी थी। किस्मत बदलती है और कब- कोई नहीं जानता। सोचिए- जिन ज्यादातर ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटरों को वर्ल्ड कप विनर के तौर पर ऑस्ट्रेलिया लौटना था, वे भारत से टी20 सीरीज हारने वाली टीम के क्रिकेटर के तौर पर लौटने के बहुत करीब हैं। क्या वर्ल्ड कप विनर खिलाड़ियों को जीत का लुत्फ उठाने का हक नहीं था? 1983 वर्ल्ड कप में कपिल देव की जो टीम खेली उसके ज्यादातर क्रिकेटरों का वर्ल्ड कप के बाद, यूएसए/यूरोप घूमने का प्रोग्राम था, सब बुकिंग थीं, श्रीकांत तो नई दुल्हन को साथ ले गए थे इंग्लैंड के बाद यूएसए में हनीमून के लिए- जैसे ही कपिल देव की टीम ने वर्ल्ड कप जीता, सारी बुकिंग कैंसिल हुईं और पूरी टीम जीत का जश्न मनाने भारत वापस लौटी।

वजह ढूंढनी है तो सामने है- 6 महीने में टी20 वर्ल्ड कप है उसी की ये एक बेहतरीन तैयारी है। इसीलिए बीसीसीआई ने सपोर्ट मांगा। लगा था वर्ल्ड कप की थकान के बाद इन मैचों को स्टेडियम/टीवी/मोबाइल पर कौन देखेगा पर ये भारत है और क्रिकेट के दीवानों का देश- टीम इंडिया खेल रही है तो हर मैच देखने के लिए तैयार।

ऐसा नहीं कि इतनी जल्दी एक नई इंटरनेशनल सीरीज खेलने पर सिर्फ भारत में सब हैरान हैं- ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर भी यही सोच रहे हैं। जिस टीम ने वर्ल्ड कप जीता उसके 7 खिलाड़ी इन टी20 के लिए भारत में रुके जबकि ओपनर डेविड वार्नर ने बिलकुल आखिर में रुकने से इंकार कर दिया। तब उनकी जगह लेने ऑलराउंडर एरोन हार्डी को बुलाया। पैट कमिंस, जोश हेज़लवुड, मिचेल स्टार्क, मिचेल मार्श और कैमरून ग्रीन को घरेलू टेस्ट समर से पहले वर्कलोड मैनेजमेंट पॉलिसी के कारण टी20 के लिए नहीं चुना।

अब क्रिकेट शेड्यूलिंग यही है। इस दौर की क्रिकेट यही है। भारत के विरुद्ध वर्ल्ड कप फाइनल में 137 (120) की पारी के लिए मैन ऑफ द मैच ट्रैविस हेड भी टी20 टीम में हैं। स्टीव स्मिथ को ओपनर बनाने का प्रयोग चल रहा है- अगले साल वेस्टइंडीज और यूएसए में टी20 वर्ल्ड कप से पहले इस रोल में वे ऑडिशन दे रहे हैं। उन्हें पिछले साल टी20 टीम से हटा दिया था पर पिछले सीज़न की बिग बैश लीग में सिडनी सिक्सर्स के लिए लगातार दो 100 लगाने के बाद वे स्कीम में वापस आ गए। कप्तान- विकेटकीपर मैथ्यू वेड।

इसीलिए बीसीसीआई और अन्य बोर्ड पर ये आरोप लगता है कि अपने खिलाड़ियों के साथ ग्लेडियेटर्स जैसा व्यवहार करते हैं। वे रोबोट नहीं हैं जिन्हें खेलने के लिए पेमेंट मिल रहा है। वे इंसान हैं जिनकी सही केयर और सेफ्टी  की जरूरत है। तब भी भारत में सब टीम इंडिया के दीवाने हैं। फर्क सामने है- टिकट के लिए मार-धाड़ नहीं, कीमतें आसमान नहीं छू रही, अखबारों में कवरेज 2-3 पेज से 2-3 कॉलम हो गया है और सबसे बड़ी बात ये कि अहमदाबाद की हार को भुलाने का मौका मिला। इसलिए ही पहले टी20 में जीत के बाद सोशल मीडिया पर लिख दिया कि वर्ल्ड कप की हार का बदला ले लिया पर दूसरा मेसेज इससे भी बेहतर था- ये जीत लगभग वैसे ही है जैसे कि कई हजार रुपये की फिजूलखर्ची के बाद 1 रुपये का कैश-बैक मिलना।  

सूर्यकुमार यादव की पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में सिर्फ दो रिपोर्टर आए- अहमदाबाद में लगभग 200 मौजूद थे। सवाल इस सीरीज से ज्यादा वर्ल्ड कप को लेकर थे, हर रोज चर्चा अभी भी रोहित शर्मा और विराट कोहली के टी20 क्रिकेट खेलने के बारे में है। तब भी एक नया माहौल है और उसके लिए वजह भी है। उदाहरण के लिए- विशाखापत्तनम भारत के 53 इंटरनेशनल ग्राउंड में से एक है और वर्ल्ड कप का कोई मैच न मिलने के बाद वे टी20 इंटरनेशनल मिलने पर खुश क्यों न होंगे?

आजकल शेड्यूलिंग ब्रॉडकास्टर की जरूरत को पूरा करने के लिए होती है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वर्ल्ड कप फाइनल कितनी रात पहले खेला था, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि कुछ घंटे पहले वर्ल्ड कप फाइनल हार गई थी टीम इंडिया, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि टीम इंडिया में विराट कोहली/रोहित शर्मा हैं या नहीं- जो बात मायने रखती है वह ये कि क्रिकेट की इकॉनमी काफी हद तक दो टीम वाली सीरीज के ब्रॉडकास्ट से मिले पैसे से चलती है।

भारत में ऑस्ट्रेलिया की ये टी20 सीरीज या फरवरी में उनकी वेस्टइंडीज के विरुद्ध वाइट बॉल सीरीज (ऐसी टीम के विरुद्ध जो वर्ल्ड कप के लिए भी क्वालीफाई न कर पाई) बेतुकी हैं पर क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के फॉक्सटेल के साथ कॉन्ट्रैक्ट के नजरिए से ख़ास हैं। 2018 से ऑस्ट्रेलिया में दो टीम वाली सीरीज के वनडे वैसे भी पे-चैनल पर हैं जिससे उन्हें देखने वालों की गिनती और भी कम हो गई है।
इसी तरह बीसीसीआई के पास भी वजह है- यहां भी ब्रॉडकास्टर से कॉन्ट्रैक्ट सबसे ख़ास है। वर्ल्ड कप को 10-टीम के लीग फॉर्मेट में खेला ही उनके कहने पर ताकि टीम इंडिया के कम से कम 9 मैच की गारंटी और आईसीसी के ब्रॉडकास्टर स्टार स्पोर्ट्स के लिए हर मैच कीमती।

बेन मैकडरमॉट, जोश फिलिप और क्रिस ग्रीन को भारत में ऑस्ट्रेलिया की टी-20 टीम में शामिल किए जाने की सबसे बड़ी वजह उन खिलाड़ियों की थकान और घर से दूरी की उदासी है क्योंकि वे तो लगभग तीन महीने से भी ज्यादा से घर से बाहर हैं। बीसीसीआई ने तो लगभग ए टीम को खिलाया है- अहमदाबाद में फाइनल से हारने वाले खिलाड़ियों में से सिर्फ कप्तान सूर्यकुमार यादव खेल रहे हैं। तीसरे मैच के बाद श्रेयस अय्यर की टीम में वापसी होगी। दूसरी तरफ ट्रैविस हेड, ग्लेन मैक्सवेल, स्टीव स्मिथ, एडम ज़म्पा, सीन एबॉट, मार्कस स्टोइनिस और जोश इंगलिश (साथ में ट्रैवलिंग रिजर्व तनवीर संघा) जैसे खिलाड़ियों के लिए, टी20 सीरीज ने वर्ल्ड कप टूर और लंबा कर दिया। नोट कीजिए- ऑस्ट्रेलिया का घरेलू सीज़न पहले से ही  चल रहा है।

इनमें से ज्यादातर वर्ल्ड कप से पहले दक्षिण अफ्रीका भी गए थे वाइट बॉल टूर पर। स्मिथ ने पाकिस्तान के विरुद्ध टेस्ट खेलने की सहमति दे दी है पर टीम में शामिल होने के लिए पर्थ जाने से पहले 8 दिसंबर को वे बिग बैश लीग के शुरुआती मैच में सिडनी सिक्सर्स के लिए खेलेंगे। कमिंस, मिचेल स्टार्क और सीए प्रेसिडेंट माइक बेयर्ड एससीजी में न्यू साउथ वेल्स-तस्मानिया शेफील्ड शील्ड मैच के लंच ब्रेक के दौरान एससीजी में वर्ल्ड कप साथ ले गए थे- बस यही है ऑस्ट्रेलिया में वर्ल्ड कप जीतने का जश्न। भारत में सीरीज का मतलब है टीम के लिए ऐसा कोई मौका नहीं कि खिलाड़ी एक साथ ऑस्ट्रेलिया में जीत का जश्न मनाएं। 1989 एशेज टूर, 1995 में वेस्टइंडीज में जीत और 1999 में इंग्लैंड में वर्ल्ड कप जीत जैसी कई और जीत के लिए पिछली ऑस्ट्रेलियाई टीमों को मिली भव्य टिकर टेप परेड और पब्लिक प्रोग्राम, कमिंस की टीम के हिस्से में नहीं आए।  

  • चरनपाल सिंह सोबती

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