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एमएस धोनी जैसे कुछ ही खिलाड़ी हैं जो ऐसा न सोचते हैं और न करते हैं- आम तौर पर खिलाड़ी अपने रिटायर होने के फैसले को किसी बड़े मुकाम से जोड़ देते हैं। इसीलिए कोई बड़ा रिकॉर्ड, किसी ख़ास मैच/टूर्नामेंट में जीत और या फिर ऐसा इशारा कि मौका है कि इज्जत से क्रिकेट को खुद ही अलविदा कह दो- खिलाड़ी के रिटायर होने के ज्यादातर फैसलों के साथ जुड़ते देखे गए हैं। ये बात इस समय अजिंक्य रहाणे के संदर्भ में कही जा रही है क्योंकि उनका क्रिकेट करियर इन मुकाम की कसौटी पर खरा उतर रहा है। जैसे ही रहाणे की कप्तानी में, मुंबई टीम रणजी ट्रॉफी 2023-24 के फाइनल में पहुंची तो ये चर्चा शुरू हो गई कि उनके लिए इज्जत से क्रिकेट को अलविदा कहने का मौका रणजी ट्रॉफी सीजन खत्म होने से बेहतर और कोई नहीं होगा।

कुछ फैक्टर ध्यान देने वाले हैं :

  • वे टीम इंडिया से वैसे भी न सिर्फ बाहर हैं, उनके नाम की चर्चा भी नहीं करते सेलेक्टर।
  • इंग्लैंड के विरुद्ध सीरीज ने साफ़ बता दिया कि अजीत अगरकर एंड कंपनी, रणजी ट्रॉफी में पुजारा के रन और 100 के बावजूद उनकी ओर नहीं, भविष्य को देख रहे हैं तो ये रहाणे के लिए भी इशारा है इंटरनेशनल क्रिकेट करियर पर आख़िरी लाइन खींचने का।
  • फार्म की बात करें तो रहाणे से तो रणजी ट्रॉफी में भी नहीं बन रहे- फाइनल से पहले तक (इस सीजन में) 7 मैच की 11 पारी में 134 रन और फाइनल में पहली पारी में 35 गेंद पर 7 रन। वे इसे खराब फॉर्म को सिर्फ एक दौर कहते हैं पर सब जानते हैं कि ऊंचे दर्जे की क्रिकेट में उनका बेहतर दौर बीत चुका है।
  • ये तो मुंबई के सेलेक्टर्स ने उनके सीनियर होने का सम्मान किया- न सिर्फ इस रणजी ट्रॉफी सीजन के लिए कप्तान बनाया, रन न बनाने के बावजूद सीजन के बीच में भी नहीं हटाया। फिर भी मुंबई को क्रिकेट में भविष्य देखना है और एक ऐसे नए कप्तान की जरूरत है जो सबसे पहले तो टीम में एक खिलाड़ी के तौर पर जगह का हकदार हो। वे कप्तानी में बाक़ी खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बने, टीम को 42वां टाइटल जीतने के करीब ले आए पर सिर्फ कप्तानी पर मुंबई टीम उन्हें कब तक झेलेगी?
  • सच तो ये है कि इस सीजन के रिकॉर्ड पर मुंबई टीम में एक बल्लेबाज के तौर पर उनके लिए जगह नहीं बनती। ये उनके फर्स्ट क्लास क्रिकेट करियर में 17 सीज़न में सबसे बुरा दौर है। इस सीजन में लगातार रणजी ट्रॉफी पारी में उनके 0,0,16,8,9,1,56*,22, 3,0,19 और 7 के स्कोर (फाइनल में पहली पारी तक) किसी मोबाइल नंबर जैसे ज्यादा नजर आते हैं।
  • इसी को आधार बनाकर, उनके पुराने क्रिकेट स्तर पर भी सवाल उठ रहे हैं और अब तो ये भी कहा जाने लगा है कि वे कभी उस स्तर के बल्लेबाज थे ही नहीं, जिसके लिए मशहूर हुए।
  • पिछले 5/6 साल से टेस्ट क्रिकेट में रिकॉर्ड ख़राब हुआ है- इस दौरान बल्लेबाजी औसत 51 से गिरकर 39 हो गया और ये संकेत है करियर को अलग तरह से देखने का। अजिंक्य रहाणे का टेस्ट करियर रिकॉर्ड दो हिस्सों में बांटते हैं :
    2013 से 2016 तक: 32 टेस्ट, 8 शतक के साथ 47.33 औसत से 2272 रन
    2016 से 2023 तक: 53 टेस्ट, 33.39 औसत से 4 शतक के साथ 2805 रन
  • जानकार तो कहते हैं कि जिस तरह की बेंच स्ट्रेंथ टीम इंडिया के पास है- उसे देखते हुए वे पहले ही ज्यादा टेस्ट खेल गए।
  • इसीलिए टीम इंडिया के सेलेक्टर्स से प्रेरणा लेकर मुंबई के सेलेक्टर भी, रणजी ट्रॉफी फाइनल के नतीजे की परवाह किए बिना, मुंबई क्रिकेट का भविष्य देखें ताकि कोई और उनकी जगह पर खेल सके।

हां, ये संभव है कि अभी रहाणे सिर्फ रेड बॉल क्रिकेट से रिटायर हों क्योंकि आईपीएल में जब टीम कॉन्ट्रैक्ट दे रही है तो वे क्यूं न पैसा कमाएं? इसके अतिरिक्त महेंद्र सिंह धोनी की नई बातें, चेन्नई सुपर किंग्स कैंप में रहाणे के करियर को लाइफ लाइन दे रही हैं। धोनी, टीम में अपने किसी नए रोल की बातें कर रहे हैं और इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि वे कप्तानी छोड़ सकते हैं। तो कौन होगा कप्तान? संकेत ये हैं कि रवींद्र जडेजा से ज्यादा, रहाणे को दावेदार माना जा रहा है। वे अपने अनुभव की बदौलत रेस में सबसे आगे हैं- रुतुराज गायकवाड़ को अभी सिर्फ ग्रूम किया जाएगा। इस तरह रहाणे एक स्टॉप गैप इंतजाम होंगे।

खैर, इस सबसे हट कर, हाल फिलहाल रहाणे को अपने रेड बॉल करियर पर सोचना होगा- इससे पहले कि किसी भी टीम में उनके लिए जगह न रहे।
इसलिए रणजी ट्रॉफी फाइनल रहाणे के लिए इज्जत से क्रिकेट से रिटायर होने का बहुत अच्छा मौका है। इस रिपोर्ट के लिखने तक फाइनल में दोनों टीम की एक-एक पारी खत्म हो चुकी है। वे दूसरी पारी में बैट से कुछ ख़ास कर जाएं (दूसरे दिन का खेल खत्म होने तक 58* रन बनाकर क्रीज़ पर हैं) तब तो ये और भी बड़ा बोनस होगा ‘सही समय’ पर रिटायर होने के लिए।

  • चरनपाल सिंह सोबती

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